Double Murder Mystery Story, Read Suspense Thriller Stories In Hindi | Post Links
Thriller

Double Murder Mystery Story, Read Suspense Thriller Stories In Hindi

July 30, 2017

सुरेश की लाश दो दिन बाद पास के जंगल से मिली लाश पूरी तरह से सड़ चुकी थी, सुरेश की पत्नी उसकी गुमसुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवा दी थी इसलिए पुलिस ने सुरेश की पत्नी नीलम को लाश की शिनाख्त के लिए बुलवा भेजा, लाश देखने के बाद नीलम रो पड़ी क्यूंकि ये लाश नीलम के पति सुरेश की थी, अब पुलिस को लाश की पहचान मिल गई थी, पुलिस ने लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा, और खुनी को पकड़ने के लिए मुहीम चालू कर दी, सुरेश शहर का जानामाना व्यवसायी था. पिता की मौत के बाद सारा कारोबार वही संभाल रहा था, जिस की वजह से वह काफी व्यस्त रहता था. वह सुबह घर से निकलता था तो रात 10 बजे से पहले लौट नहीं पाता था.
सुरेश अपनी पत्नी के साथ शहर के अलग जगह रहता है क्यूंकि सुरेश के घर वालो को नीलम से शादी करना स्वीकार्य नहीं था, नीलम बेहद खूबसूरत थी. शादी के अभी दो साल ही बीते थे कि यह हादसा हो गया था. लाश बरामद होने के बाद पुलिस नीलम से पूछताछ करने पहुंची तो पहला सवाल यही किया, ‘‘आप को किसी पर शक है?’’

‘‘नहीं.’’ सुबकते हुए नीलम ने कहा.

‘‘याद कीजिए, आप के पति का कभी किसी से लेनदेन को ले कर विवाद तो नहीं हुआ था, जिस का उन्होंने आप से जिक्र किया हो?’’

‘‘वह व्यवसाय की बातें घर पर बिलकुल नहीं करते थे.’’

पुलिस द्वारा की गई पूछताछ में नीलम ने जो बताया था, उस के अनुसार, सुरेश का स्पेयर पार्ट्स का काफी बड़ा कारोबार था. जिसके कारण उसे बहुत से लोगो से मिलना पड़ता था. इस फ्लैट में आए उन्हें ज्यादा दिन नहीं हुए थे. गार्ड के अनुसार वह ठीकठाक आदमी था. सुरेश के बारे में गार्ड इस से ज्यादा कुछ नहीं बता सका था. सुरेश बड़ा कारोबारी था, इसलिए शहर के व्यापारी उस के कातिलों को पकड़ने के लिए पुलिस पर काफी दबाव बनाए हुए थे. बारबार आंदोलन की धमकी दे रहे थे. कातिलों तक पहुंचने के लिए पुलिस पूरा जोर लगाए हुए थी. सुरेश की किसी व्यापारी से दुश्मनी तो नहीं थी, इस के लिए उस के कर्मचारियों से पूछताछ की गई. उन सब का कहना था कि रुपयों पैसों के लिए उन्होंने अपने मालिक को कभी किसी से लड़ते झगड़ते नहीं देखा था. पुलिस के लिए हैरानी वाली बात यह थी कि घर वाले कुछ बोलने को तैयार नहीं थे. इस की वजह शायद सुरेश से घर वालों की नाराजगी थी.

क्यूंकि सुरेश से प्रेम विवाह किया था लेकिन इतनी सी बात पे अपने बेटे को मरवा देना ये पुलिस को नहीं समझ में आ रहा था लेकिन फिर भी खून तो हुआ था और शक के घेरे में सब लोग थे.

पुलिस ने सुरेश के सभी नंबरों की काल डिटेल्स निकलवा कर जांच की. उन में कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला. घूमफिर कर शक की सुई नीलम पर आ टिकी. इस प्रेम विवाह से सुरेश के घर का कोई भी सदस्य खुश नहीं था. इस के बावजूद सुरेश भाइयों के साथ ही व्यवसाय कर रहा था. सभी पहले की ही तरह मिलजुल कर व्यवसाय करते थे. सुरेश अपनी मां से मिलने घर भी जाया करता था.

फ्लैटों में रहने वालों को वैसे भी एकदूसरे के बारे में कम ही पता होता है. अगर इलाका पौश हो तो ऐसे मामले में लोग चुप्पी साधे रहने में ही अपनी भलाई समझते हैं. फ्लैट बने ऐसे होते हैं कि अंदर क्या हो रहा है, बगल वाले को भी पता नहीं चलता. लेदे कर एक गार्ड ही बचता था, जिसे पता होता था कि इमारत में कौन कब आताजाता है. इसलिए पुलिस गार्ड के पास पहुंची.

मामले की जांच कर रहे इंसपेक्टर शर्मा ने पूछा, ‘‘तुम हर आनेजाने वाले का रिकौर्ड रखते हो?’’

‘‘नहीं साहब, यहां ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है. आने वाले से सिर्फ पूछ लेते हैं कि किस से मिलना है?’’ गार्ड ने सहज भाव से कहा.

‘‘पूछने के बाद उसे जाने देते हो?’’ इंसपेक्टर शर्मा ने पूछा.

‘‘नहीं, पहले उस फ्लैट वाले से फोन पर पूछते हैं, जिस में उसे जाना होता है. उधर से भेजने के लिए कहा जाता है, तभी अंदर जाने देते हैं.’’

‘‘क्या, नीलम मैडम से भी कोई मिलने आता था?’’

‘‘साहब, यहां कोई न कोई किसी न किसी से मिलने आता ही रहता है. मैं किसकिस के बारे में बता सकता हूं.’’

‘‘अगर एक से ज्यादा बार कोई मिलने आया हो, तब तो पहचान सकते हो?’’

‘‘क्यों नहीं साहब,’’ गार्ड ने कहा.

इस के बाद इंसपेक्टर शर्मा नीलम के फ्लैट पर पुन: लौट आए. उस से एक बार फिर पूछा, ‘‘मैडम, फिर याद कीजिए, कोई तो होगा, जिस से आप के पति की दुश्मनी रही होगी?’’

‘‘एक ही बात आप लोग कितनी बार पूछेंगे. मैं ने बताया तो कि मुझे कुछ नहीं पता.’’ नीलम थोड़ा झल्ला कर बोली.  इंसपेक्टर शर्मा ने इधर उधर देखते हुए पूछा, ‘‘आप यहां अकेली ही रहती हैं?’’

‘‘क्यों?’’ नीलम ने थोड़ा विचलित हो कर पूछा.

‘‘मेरे कहने का मतलब यह है कि संकट की इस घड़ी में कोई तो आप का करीबी होना चाहिए.’’

‘‘मेरी मम्मी आई हैं.’’

इस बीच इंसपेक्टर शर्मा उस के चेहरे पर आनेजाने वाले भावों को पढ़ते रहे. उन्होंने अगला सवाल किया, ‘‘क्या मैं उन से मिल सकता हूं?’’

‘‘इस समय वह घर में नहीं हैं.’’

‘‘कहां गई हैं?’’

‘‘बाजार से कुछ जरूरी सामान लेने गई हैं.’’

‘‘कब तक लौटेंगी?’’

‘‘डेढ़-दो घंटे लग सकते हैं.’’ नीलम ने कहा.

‘‘कोई बात नहीं, मैं फिर आऊंगा तो उन से मिल लूंगा. आप जांच में सहयोग करती रहें, निश्चय ही एक न एक दिन कातिल पकड़ा जाएगा.’’ इंसपेक्टर शर्मा ने उठते हुए कहा.

अभी तक पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा था और वयापारी संगठन ने पुलिस पे दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है, इंस्पेक्टर शर्मा में सुरेश के बड़े भाई अजय को पूछताछ के लिए बुलाया.
इंस्पेक्टर शर्मा : आपने अपने छोटे भाई को क्यों मरवा दिया.

सुरेश का बड़ा भाई अजय: ये आप क्याबकवास कर रहे है, आपको मालूम है आप मेरे पे क्या इल्जाम लगा रहे है क्या साबुत है आपके पास.

इंस्पेक्टर शर्मा: साबुत है तभी तो पूछ रहे है क्यों करवा दिया पैसे के लिए या जायदाद के लिए या…..

सुरेश का बड़ा भाई अजय : या मतलब? चौकते हुए भाव से.

इंस्पेक्टर शर्मा : या का मतलब आप उसकी शादी से खुश नहीं थे और आपकी परिवार की बदनामी हो रही थी इसलिए मरवा दिया आपने, अब सच काबुल करिए नहीं तो हमे अच्छे से आता है सच काबुल करवाना लेकिन आपको इससे बहुत तकलीफ होगी.

सुरेश का बड़ा भाई : लगता है आपको केस सॉल्व नहीं करना है या आप कातिल से पैसे ले लिए है इसलिए सारा इलाज्म मेरे पे डाल के केस बंद करना चाहते है (गुस्से भरे भाव से ).
इंस्पेक्टर शर्मा : आपको जो सोचना है सोच लीजिये लेकिन मै कातिल को जरूर पकड़ लूंगा तब आपसे अच्छे से पूछ – ताछ करूँगा अभी आप जा सकते है. गुस्से भरे भाव से.

अजय वहाँ से चला जाता है लेकिन पुलिस के हाथ फिर से कुछ नहीं लगता है, इंस्पेक्टर शर्मा फिर से नीलम के फ्लैट पे जाते है लेकिन वह पे कोई दूसरा गार्ड था.

इंस्पेक्टर शर्मा : पहले वाला गार्ड कहा चला गया………….चौकते हुए.

नए गार्ड : वो तो मुझे नहीं मालूम साहेब आप सेक्टरी साहेब से पूछ लीजिये (डरते हुए भाव से), और सेकेटरी साहेब को बुला देता है.

इंस्पेक्टर शर्मा : पुराने वाले गार्ड को आपने क्यों निकल दिया.

सेकेटरी : मै क्यों निकलूंगा अचानक उसने ही मुझे फ़ोन करके बोला मैं अब काम पे नहीं आऊंगा मेरा हिसाब कर दजीये घर जा रहा हु और अपना पगार लेके चला गया.

इंस्पेक्टर शर्मा : वो कहाँ रहता है मालूम है उसके पता दजीये ?

सेकेटरी : उसका यहाँ का पता है लेकिन उसका घर बिहार में कहीं रहता है वह का पता नहीं है मेरे पास.

इंस्पेक्टर शर्मा गुस्से से : ये कैसे किसी को भी नौकरी पे रख लेते है आप आपको मालूम है न किसी को नौकरी पे रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन करवाना जरुरी है अगर आप लोग ही अपना फर्ज नहीं निभाएंगे तो तो पुलिस अपना काम काम कैसे करेगी? आगे से इस बात का धयान रखियेगा .
‘इतना कह के इंस्पेक्टर शर्मा वहाँ से चले जाते है, अब पुलिस के पास सुरेश के कातिल को ढूंढने के अलावा उस गार्ड के नौकरी छोड़ने का कारण पता करना करना था, इंसपेक्टर शर्मा थाने आ कर इसी मामले पर गहराई से विचार करने लगे. उन की समझ में नहीं आ रहा था कि गार्ड ने नौकरी क्यों छोड़ दी, पुलिस की परेशानी बढ़ती जा रही थी और केस और भी ज्यादा पेचीदा होते जा रहा था, पुलिस ने उस गार्ड के नंबर का कॉल डिटेल निकलवाई और नंबर को सर्विलांस पे लगा दिया लेकिन गार्ड का नंबर ऑफ था. कॉल डिटेल में कुछ खास नहीं था जिससे क़तील और उस गार्ड के गायब होने का राज पता चले.
तभी अचानक नीलम का फोन आया. वह थोड़ी घबराई हुई थी. उस ने हकलाते हुए कहा, ‘‘इंसपेक्टर साहब, जल्दी आइए. मैं आप को एक जरूरी बात बताना चाहती हूं.’’

इंसपेक्टर शर्मा तुरंत नीलम के घर पहुंच गए. उन्हें कागज का टुकड़ा देते हुए उस ने कहा, ‘‘यह देखिए, इस में क्या लिखा है?’’

इंसपेक्टर शर्मा ने उसे खोल कर देखा. उस में लिखा था, ‘10 लाख रुपए 26 फरवरी तक पहुंचा देना, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहना.’

‘‘यह आप को कहां मिला?’’ इंसपेक्टर शर्मा ने पूछा.

‘‘गद्दे के नीचे रखा था.’’

27 फरवरी को सुरेश की हत्या हुई थी, जाहिर था, किसी ने पैसे मांगे थे. सुरेश ने पैसे नहीं दिए तो उस ने उसे मार दिया. पैसे किसे देना था, कहां देना था, इस का पता लगाना अब मुश्किल था. क्योंकि काल डिटेल्स में ऐसा कोई नंबर नहीं मिला था, जिस पर इस तरह पैसे वसूलने का शक किया जाता. इंसपेक्टर शर्मा ने पूछा, ‘‘सुरेश ने आप से इस बारे में कोई चर्चा की थी?’’

‘‘नहीं.’’ नीलम ने संक्षिप्त सा जवाब दिया.

‘‘ऐसा कैसे हो सकता है, आप उन की पत्नी हैं. ऐसे मामलों में पति अपनी पत्नी से जरूर जिक्र करता है.’’

‘‘हो सकता है, वह मुझे परेशान न करना चाहते रहे हों.’’

बहरहाल, इंसपेक्टर शर्मा ने उस कागज के टुकड़े को सहेज कर रख लिया.

तभी फ़ोन कंपनी से पुलिस को एक लीड मिलती है गार्ड का नंबर अभी ओन हुआ है जगह है बनारस – इलाहाबाद हाईवे के पास वाला जंगल में, इंस्पेक्टर शर्मा फ़ौरन अपनी टीम से साथ रवाना हो जाते है, लैकिन वहाँ पे बहुत से लोग एक तरफ मुँह करके खड़े है जैसे कुछ देख रहे है तभी पुलिस की नजर एक जलते हुए आदमी के तरफ जाते है पुलिस तुरंत उस आग को बुझाने का प्रयास करती है लेकिन बहुत देर हो चुकी होती है शरीर लगभग भाग पहचाने लायक नहीं रहता है, पुलिस पास पड़े हुए बैग से लाश की पहचान उसी गार्ड के रूप में करती है जिसे पुलिस ढूंढ रही थी, अब पुलिस के हाथ फिर से खली हो गए क्यों उनके अहम् सुराग की मौत हो गई थी अब सुरेश की हत्या के साथ उस गार्ड की हत्या का राज भी सुलझाना था,  जिस जगह उस गार्ड की शरीर को जलता हुआ देखा गया था वहाँ पे पूछ – ताछ करने गई लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा. पुलिस के खबरी ने पुलिस को बताया की फिरौती के लिए कोई भी गैंस्टर ने किसी से कोई डिमांड नहीं की है, क्यूंकि अगर ऐसा होता तो हमलोगो को पहले पता चल जाता, अब इंस्पेक्टर शर्मा आपने साथ के पुलिस वालो से विचार करते है तभी इंस्पेक्टर शर्मा के एक साथी जो पुलिस वाले थे उन्होंने ने सुरेश के परिवार वालो की कॉल डिटेल्स निकलवाने को कहा क्यूंकि ये मामला फिरौती का नहीं था और नहीं कोई बाहरी रंजिस का सुराग नहीं लग रहा था इसलिए ये मामला घरेलु ही लग रहा है, इन्सोेक्टर शर्मा ने ऐसा ही किया तभी एक अहम् सुराग हाथ लगता है, और सुरेश के बड़े भाई अजय को थाने पे बुलाती है.

इंस्पेक्टर शर्मा : कल दोपहर आप बनारस – इलाहाबाद हाईवे पे क्या कर रहे थे ?

अजय : जी ये आप क्या बोल रहे है मैं तो आपने ऑफिस में था (चौकते हुए).

इंस्पेक्टर शर्मा : देखो अजय सच बता दो क्यूंकि कल तुम जिस जगह थे उस जगह मुझे उस गार्ड की लाश मिली है, और मुझे लगता है तुमने ही आपने भाई से 10 लाख की फिरौती मांगी और जब उसने नहीं दिया तो तुमने उसे मर दिया लैकिन उस गार्ड को क्यों मारा क्या गार्ड भी तुम्हारे साथ शामिल था.

अजय :  ये सच है की मै कल इलाहाबाद जा रहा था लेकिन मैंने किसी को नहीं मारा.

इंस्पेक्टर शर्मा : लगता है  तु ऐसे सच काबुल नहीं करेगा तुम्हारी खातिरदारी करनी ही पड़ेगी क्यों तुम कल इलाहाबाद नहीं गए थे वापिस उस जगह से आपने ऑफिस के लिए चले गए थे सच बताओ मेरे पास तुम्हारी कॉल डिटेल्स है……….गुस्से भरे सवर में.

अजय : आपने माथे का पसिना पोछते हुए देखिये सर आप जो कह रहे है वो मेरे समझ मे नहीं आ रहा है.

तभी इंस्पेक्टर शर्मा आपने हवलदार को अजय की धुलाई के लिए इशारा करता है.

एक घंटे के बाद……….

इंस्पेक्टर शर्मा : अब कुछ बोलोगे या और खातिरदारी करवाऊ.

अजय : मैं सब सच बताता हु, मैंने गार्ड को मारा, लेकिन सुरेश को मैंने नहीं मारा.

इंस्पेक्टर शर्मा : तो किसने मारा सुरेश को और तुमने गार्ड को क्यों मारा…….गुस्से में.

अजय : सुरेश को वो वो वो …………

इंस्पेक्टर शर्मा : क्या वो वो बक रहे हो सच बताओ नहीं तो एक भी हड्डी सलामत नहीं बचेगी.

अजय : सुरेश की पत्नी नीलम ने सुरेश को मारा.

इंस्पेक्टर शर्मा : क्या……………..चौकते हुए.

अजय : ये सच है.
इंस्पेक्टर शर्मा तुरंत सुरेश की पत्नी नीलम को लाने के लिए एक टीम भेजते है.

इंस्पेक्टर शर्मा : बतओ तुमने सुरेश को क्यों मारा, सुरेश तुम्हारा पति था फिर क्यों मारा.
सुरेश को नहीं मरना चाहती थी……..नीलम रोते हुए

इंस्पेक्टर शर्मा : पूरी बात बताओ.

तीन साल पहले…………….

मैं और सुरेश कॉलेज के दिनों से रिलेशन में थे, हम दोनों एक दूसरे से बहुत प्यार करते थे और शादी करना चाहते थे लेकिन उसके घर वाले इस फैसले से नाराज थे और सुरेश की शादी मुझसे हो ये नहीं चाहते थे लेकिन सुरेश ने मुझसे शादी की इस कारण उसके घर वालो ने मुझे और सुरेश को निकाल दिया और हम शहर से दूर रहने लगे लेकिन बिज़नेस एक ही था सुरेश को बिज़नेस से अलग नहीं किया गया था, शादी के बाद सुरेश एकदम से बदल गया दिन भर सिर्फ काम और काम मेरे लिए अब उसके पास समय नहीं था सिर्फ पैसे कमाने की धुन हो गई थी उसे रात में भी मैं उसके साथ समय बिताना चाहती थी लेकिन उसे तो मुझसे ज्यादा काम और रात में शराब के साथ बिताना अच्छा लगने लगा था, मैं बहुत उदास रहने लगी थी वो रोज रात को पिके आते थे और उनके बड़े भाई उन्हें छोड़ने आते थे, सुरेश के बड़े भाई अजय का हमारे यहाँ आना जाना था कभी काम के सिलसिले में और कभी सुरेश को छोड़ने के लिए वो आते थे, कभी कभी उनसे बात हो जाती थी, और मैं अजय के तरफ अकर्षित होने लगी थी शायद अजय को ये पता चल गया था की मैं उसके तरफ आकर्षित हु, मेरी शादी की सालगिरह थी उस दिन सुरेश ने बहुत पी रखी थी उसे खड़ा भी नहीं हुआ जा रहा था, सुरेश के बड़े भाई उनको छोड़ने आये थे, अजय को पता था मेरे और सुरेश के बिच में कुछ अच्छा नहीं चल रहा है, हमारी सालगिरह का दिन अजय को पता था इसलिए वो मेरे लिए गिफ्ट लेके आये थे, उन्होंने सुरश को सुला दिया और गिफ़्ट मेरे हाथ में देते हुए बोले.

अजय : ये लो तुम्हारी शादी की सालगिरह पे एक छोटा सा गिफ्ट, शायद ये तुम्हे पसंद आये…………मुस्कुराते हुए.

नीलम : अरे इसकी क्या जरुरत थी, मुझे जिनकी जरुरत थी वो तो आज……………… खैर छोड़िये आप बैठिये मैं आपके लिए कुछ बना के लाती हु.

अजय : अरे रहने दो कुछ बनाने की जरुरत नहीं है, तुम गिफ्ट देखो और इसे पहन के मेरे सामने आओ……………मुस्कुराते हुए.

नीलम ठीक है अभी आती हु.

मैंने गिफ्ट देखा तो वो एक छोटा सा नाईट ड्रेस था जो मुश्किल से मेरी जांघो तक ही आता, मुझे बहुत अजीब सा लगा मैं कुछ देर सोची फिर मैंने फैसला लिया आज जो होगा देखा जायेगा क्यूंकि मुझसे मेरा अकेलापन बर्दास्त नहीं हो रहा था और मुझे एक साथी की जरुरत थी मेरी जरुरत को समझे और मुझे बहुत प्यार करे, इसलिए मैंने वो ड्रेस पहन के उनके सामने चली गई वो ड्रेस मेरी जांघ तक आ रहा था मुझे बहुत शर्म आ रही थी, और फिर हमारे बिच रिलेशन बन गया, इसके बाद रोज अजय सुरेश को छोड़ने आते और सुरेश को सुला के मेरे साथ रिलेशन बनाते थे कभी कभी सुरेश के ऑफिस जाने के बाद भी आ जाते थे ये लगभग रोज का हो गया था, एक दिन सुरेश ने मुझे और अजय को एक साथ बिस्तर पे देख लिया और बहुत गुस्सा करने लगे मैं काफी डर गई थी और मै तुरंत सुरेश की तरफ लपकी और एक रॉड से सर पे जोर से मार दिया जिसके कारण सुरेश का सर फट गया और काफी खून निकलने लगा सुरेश ने पहले से बहुत पी रखी थी इसी कारण वो अपना बचाओ नहीं कर पाया, खून के काफी बहने पे सुरेश की मौत हो गई हम दोनों काफी डर गए थे, फिर अजय ने और मैंने सुरेश की लाश को जंगल मे छोडने का प्लान बनाया और उसे गाड़ी में डाल के जंगल में अंदर की तरफ छोड़ दिया और वापिस अपने अपने घर पे आ गए,मुझे उस दिन रात भर नींद नहीं आई फिर मैने सुरेश की गुमसुदगी की रिपोर्ट लिखवा दी, ताकि पुलिस को मुझ पे शक न हो, इसी बिच एकदिन गार्ड मेरे घर पे आया और एक वीडियो दिखाया, उस वीडियो में, मैं और अजय सुरेश की लाश को गाड़ी में डाल रहे थे, मैं काफी डर गई मैंने उसे डराया लेकिन वो नहीं माना फिर मैंने पैसे का लालच दिया तो वो मान गया, लेकिन उसे कुछ और चाहिए था.

इंस्पेक्टर शर्मा : कुछ और क्या पूरी बात सच सच बताओ.

नीलम : वो मेरे साथ सोना चाहता था और अगर मै उसके साथ नहीं सोती तो वो सब को बता सच बता देता और उसने मुझे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया सुरेश की मौत के बाद अजय मेरे घर पे नहीं आये क्यूंकि आप लोगो को शक हो जाता, लेकिन उस गार्ड मेरा फायदा उठाया और हर रात दिन मेरे शरीर के साथ खेलता रहा और मै चाह के भी उसे नहीं रोक पाई, वो पागलो की तरह मुझे नोचता रहा उसके मन मे जो आता वो करता, मुझे अपना रैखाल बना दिया था और मुझसे पैसे भी ऐठने लगा. मैंने एक दिन ये सब बात अजय को बताई, अजय बहुत गुस्सा हुआ और उस गार्ड को पैसे का लालच देके पहले काम से हटवाया फिर और पैसे देने के लिए बनारस – इलाहाबाद हाईवे पे बुलाया और वही पे मार दिया.

पूछताछ के बाद इंसपेक्टर शर्मा ने नीलम और अजय को वाराणसी की अदालत में पेश किया, जहां से दोनों को जेल भेज दिया गया. इन दोनों का क्या होगा, यह तो समय बताएगा, पर सुरेश को दारू पिने की और पत्नी की वेवफाई की सजा मिल गई. आज की नई पीढ़ी आपने शरीर के जरूरतों को पूरा करने के लिए किसी भी रिश्ते का कतल कर दे रही है इसका असर हमारे समाज पे पड़ रहा है, हमारे देश में नाजायज सम्बन्ध और नाजायज सम्बन्ध के कारण हत्या का एकरा बहुत तेजी से ऊपर जा रहा है, ये हमारे समाज का काला सच है जिसे हमे स्वीकार करना होगा. बहुत जल्द हाजिर होंगे नहीं जासूसी कहानी के साथ.

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Jasusi Kahani

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